पीरियड्स में करने के व्यायाम

By | July 9, 2018

पीरियड्स में करने के व्यायाम

पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द होना बहुत पिडादायक होता है। इन दिनों थकावट और दर्द के कारण किसीं भी काम में मन नहीं लगता। कुछ लोगों  का मानना है की पीरियड्स के दिनों में आराम करना चाहीए। लेकीन वास्तव में सिर्फ बैठना नहीं चाहीए, बल्की हर दिन हलका-हलका व्यायाम करना चाहीए। इससे शरीर को आराम मिलता है। पीरियड्स के समय व्यायाम ( periods ke samay vyayam )करने से कुछ फायदे होते है जिससे उस समय होने वाले दर्द और तकलीफे कम हो सकती है। नियमित व्यायाम ( vyayam ) करने से या जिम जाने से थकान दूर हो जाती है और आप आनंदित महसुस करते है। पीरियड्स के दिनों किये जाने वाले व्यायाम ( periods mein kiye jane vale vyayam ) के कुछ प्रकार नीचे दिये है। अभी हम आपको कुछ पीरियड्स में करने के व्यायाम बताने वाले है। 

  1. टहलना ( tahalna ) :

पीरियड्स के दौरान टहलना सबसे अच्छा और आसान व्यायाम है। इससे तनाव कम होने में, निचले हिस्से को स्ट्रेच करने में और सुजन को कम करने में मदत होती है। एक्सपर्ट भी मानते है की पीरियड्स के दिन कठीन व्यायाम खतरनाक होता है।

टहलना:

टहलना:

इन दिनों पेट और निचले हिस्से का खास खयाल रखना पडता है। टहलने से शरीर की ज्यादा कॅलरी कम होती है। इससे शरीर में स्फुर्ती आ जाती है। कम से कम 30 मिनीट तक बाहर टहलना चाहीए। ऐसा करने से मांसपेशीया ढिली पडती है और दर्द कम हो जाता है।

 

  1. दौडना (doud lagana ):

अगर आप पीरियड्स के दिनों आरामदायक महसुस करना चाहते है तो सुबह के समय जॉगिंग पर जा सकती है। लेकीन इन दिनों ज्यादा जोर से या तेजी से न दौडे। दौडते समय थोडा-थोडा पानी पिते रहना चाहीए।

दौडना

दौडना

30 मिनिट के लिये यह व्यायाम करें। पुरे समय एक समान गती बनाए रखने का प्रयास करें। बिच में न रुके और इसी गती को बनाए रखने से पेट दर्द में फायदा मिलेंगा।

  1. स्ट्रेचिंग ( streatching ) :

इसमें कुछ योग मुद्रा का समावेश होता है जैसे की दृढ मुद्रा, बिल्ली मुद्रा,  और घुटनो को छाती से लगाने वाली मुद्रा करें, जिससे पेट की मांसापेशीया ढिली होने में मदद होती है।

स्ट्रेचिंग

स्ट्रेचिंग

  • दृढ मुद्रा को करने के लिये अपने पैंरो को जमीन पर रखते हुये बैठ जाये और आपकी एडिया जमीन को छुये। फिर अपने पैंरो को साथ में रखते हुये और अपनी बाहो को साइड में रखते हुते धिरे से थोडासा पिछे झुके। इस मुद्रा में थोडी देर तक रहे और लंबी सांस ले।
  • बिल्ली मुद्रा के लिये हाथ और पैंरो की बल पर झुके और पीठ से आर्च बनाये और सिर को नीचे झुकाये।
  • घुटने को छाती को लगाने वाली मुद्रा में पीठ के बल पर नीचे लेट जाये और अपने घुटने को अपनी छाती के पास लाये और अपनी पिंडली को अपनी बाहो से पकडे।
  1. पैंरो का व्यायाम ( pairo ke vyayam ) :

पैंरो का व्यायाम करने से पेट, पीठ और पैलविक मांसापेशीया को ढिला कर देती है। यह व्यायाम करने के लिये नीचे एक चटई पर लेट जाये।अपनी पैंरो को सिधा करें।

पैंरो का व्यायाम

पैंरो का व्यायाम

धीरे धीरे अपनी दाहीने पैर को उपर उठाए ताकी आपके बट के फर्ष के साथ 90° का कोन बन जाये। कुछ देर ऐसे ही रहीये, फिर अपनी पैंरो को नीचे लाये। बाये पैर के साथ भी ऐसा ही करे। यह कृती 5 से 10 बार दोहराये।

  1. अधोमुख श्वान आसन ( adhomukh shwan aasan ) :

निचले हिस्से का दर्द कम करने के लिये यह आसन अधिक फायदेमंद होता है। यह तनाव कम करने के साथ साथ आपकी पीठ को भी मजबूत करेगा। यह आसन करते वक्त अपने हाथों और पैरों के बल का उपयोग होता है।

अधोमुख श्वान आसन

अधोमुख श्वान आसन

अपने हाथो को जमीन पर सपाट रखें। टेबल मुद्रा में आ जाएं। इस अवस्था में घुटने हिप्स की चौड़ाई में होने चाहिए। पैर की उंगलियों को अंदर की ओर मोड़ें। सांस छोड़ते हुए हिप्स को ऊपर ले जाएं और पैरों को सीधा करें। ऐड़ियों को पीछे की ओर ले जाएं और जमीन से टिकाने की कोशिश करें। सिर को ज़मीन की दिशा में आरामदायक स्थिति में रखें और इस अवस्था में रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने की कोशिश करें। इस मुद्रा में 10 से 15 सेकंड तक ऐसे ही रहें।

  1. वजन उठाने का व्यायाम ( vajan uthane ka vyayam ) :

नियमित वजन उठाने से हाथों का व्यायाम होता है। इससे आपकी थकावट कम हो जाती है। इस बात का ध्यान रखे की आपको अत्याधिक वजन उठाने की आवश्यकता नहीं है।

वजन उठाने का व्यायाम

वजन उठाने का व्यायाम

आपकी क्षमता की हिसाब से यह व्यायाम करें। कोई भी ऐसा वजन ना उठाए जिससे आपके पेट पर तनाव पड जाये। ऐसा करना पीरियड्स के समय ठीक नहीं होगा।

  1. बालासन ( balasan ) :

एक चटाई पर घुटने मोड कर बैठे। अपने नितंबों को अपने पैरों के ऊपर रखें और अपने घुटनों को एक साथ ले आएँ। आगे की ओर झुके ताकि आपके धड़ आपकी जांघों पर रखा जा सकें। आपका माथा चटाई को छूना चाहिए।

बालासन

बालासन

अपने हाथों को सीधे आगे की ओर बढ़ाएं। कम से कम 15 सेकंड के लिए इसी मुद्रा में रहें। बालासन शांत और स्वास्थ्यप्रथ आसन है। यह पीठ की लंबाई को बठाता है, जिससे तनाव और खिचाव से राहत मिलती है। यह आसन पाचन शक्ती में सुधार लाती है। पीरियड्स में यह बहुत अच्छा व्यायाम है।

इस तरह कुछ व्यायाम करने से आपके अंदर जान आती है और आपका मूड ताजा रहता है। व्यायाम करने से शरीर की थकवट दूर होती है जिससे काम करने में मजा आता है।

हमने आपको बताये हुए पीरियड्स में करने के व्यायाम आपको कैसे लगे यह हमें आप निचे कमेंट करके बता सकते है। तथा आपको किसी भी प्रकार की जानकारी चाहिए हो तो आप हमे निचे कमेंट करके पूछ सकते है।

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